नव संवत्सर
नव धरा, नव विहान
बीता अतीत अब नव भविष्य
नव कल्पना, नव विचार
नव संवेदना, नव संरचना
संवारे गाँव गरीब
यह संकल्पना साकार करें
गढ़े संवारे नवराष्ट्र
आप सुखमय हो
यह समाज सुखमय हो
यही शुभेच्छा हमारी
नव प्रकाश से आलोकित
हो जगती सारी
'चैत्रे मासि जगद् ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि।
शुक्लपक्षे समग्रे तु तदा सूर्योदये सति।।
- ब्रह्म पुराण में वर्णित इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के प्रथम सूर्योदय पर ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। इसी दिन से संवत्सर की शुरूआत होती है।
हिन्दू नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा एवं चै़त्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं!